12th Geography मानव भूगोल NCERT CH-6 .द्वितीयक क्रियाएं Notes in Hindi PDF || 12th Geography CH-6.द्वितीयक क्रियाएं||12th Geography Crash Course Notes in Hindi PDF || 12th Geography Chapter wise notes in Hindi pdf 2021-23||
कक्षा – 12वी मानव भूगोल
Chapter -6.द्वितीयक क्रियाएं
Notes By :- StudyAnybody Mohd Guljar(9315230675)
प्रश्न 1 : द्वितीयक क्रिया का अर्थ बताइए । इसका क्या महत्व है ?
- द्वितीयक क्रिया : - प्राकृतिक रूप से प्राप्त कच्चे माल को नए उपयोगी माल में बदलने के कार्य को द्वितीयक क्रिया कहते हैं । इसके लिए मानव अपने कौशल , ज्ञान और श्रम का प्रयोग करता है ।
•द्वितीयक क्रिया द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है ।
• यह क्रिया कच्चे माल को और अधिक उपयोगी बना देती है ।
•लोह अयस्क को इस्पात बनाने के बाद वह और भी अधिक उपयोगी हो जाता है ।
•कुछ चीजों का उपयोग विनिर्माण प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है जैसे कि बांस का उपयोग टोकरी बनने के बाद या जूट का उपयोग रेशा बनने के बाद किया जाता है ।
प्रश्न 2 : विनिर्माण का क्या अर्थ है ? इसकी विशेषता बताइए ।
विनिर्माण : - विनिर्माण से अभिप्राय किसी भी वस्तु का उत्पादन है । जैसे कि प्लास्टिक के खिलौने बनाना ।
विनिर्माण की विशेषता :
•वस्तुओं का व्यापक स्तर पर उत्पादन ।
• मानक वस्तुओं का उत्पादन ।
प्रश्न 3 : आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की विशेषताएं बताइए ।
आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की निम्नलिखित पाँच विशेषताएं हैं :
• कौशल का विशिष्टीकरण : - बड़े पैमाने पर किए जाने वाले उत्पादन का संबंध कौशल के विशिष्टीकरण से है जिसमें श्रम विभाजन किया जाता है और प्रत्येक श्रमिक या कारीगर निरंतर एक ही प्रकार का कार्य करता है ।
• यंत्रीकरण : - यंत्रीकरण से अभिप्राय किसी कार्य को करने के लिए मशीनों का प्रयोग करना है । आधुनिक बड़े पैमाने वाले उद्योगों में मशीनों का उपयोग अधिक किया जाता है । स्वचालित यंत्रीकरण , इसकी विकसित अवस्था है ।
•प्रौद्योगिकीय नवाचार ( Technical Innovation ) : - शोध और विकासित युक्तियों के द्वारा विनिर्माण की गुणवत्ता में वृद्धि करना और मानक इकाइयों का निर्धारण करना । प्रदूषण को रोकना भी प्रौद्योगिकी नवाचार का एक पहलू है ।
• संगठनात्मक ढांचा एवं स्तरीकरण : - आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण एक बड़े संगठन के रूप में विकसित होते हैं जिसमें एक जटिल प्रौद्योगिकी यंत्र होता है जिसके लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है । उत्पादन की लागत बहुत कम हो जाती है ।
•अनियमित भौगोलिक वितरण : - आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की मुख्य विशेषता यह है कि विश्व स्तर पर इसका वितरण बहुत ही असामान है । विश्व के कुल स्थल भाग के 10 प्रतिशत से भी कम भूभाग पर इसका विस्तार है ।
प्रश्न 4 : विश्व में उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाली किन्हीं पांच कारकों का वर्णन करें ।
अथवा
प्रश्न 4 : उद्योगों की स्थापना को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बताइए ।
उद्योगों की स्थापना : - किसी स्थान पर उद्योगों की अवस्थिति या स्थापना को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है :
• बाजार तक पहुंच : - उद्योगों की स्थापना को प्रभावित करने वाले कारकों में बाजार प्रमुख है । बाजार का अर्थ मांग और लोगों की खरीदने की क्षमता होता है । विश्व में उत्तरी अमेरिका , जापान एवं ऑस्ट्रेलिया वैश्विक बाजार हैं जबकि अधिक जनसंख्या होने के कारण भारत और चीन भी वैश्विक बाजार उपलब्ध कराते हैं ।
• कच्चे माल की प्राप्ति : - कच्चे माल की प्राप्ति उद्योगों की स्थापना का प्रमुख कारक है । भारी वजन और सस्ता कच्चा माल उद्योगों की स्थापना में अहम भूमिका निभाता है । अधिकतर उद्योग कच्चे माल के स्रोत स्थल के समीप स्थित होते हैं । जैसे कि इस्पात एवं सीमेंट उद्योग ।
• श्रम की उपलब्धता : - उद्योग में श्रमिकों की आवश्यकता होती है इसलिए श्रम की उपलब्धता उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करती है ।
• ऊर्जा के साधन : - ऐसे उद्योग जिनमें अधिक शक्ति या ऊर्जा की आवश्यकता होती है उन्हें अक्सर उर्जा के साधनों के समीप स्थापित किया जाता है । आजकल जल विद्युत एवं खनिज तेल कई उद्योगों की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण कारक है ।
•परिवहन एवं संचार सुविधाएं : - कच्चे माल को कारखाने तक लाने के लिए और तैयार माल खूब बाजार तक पहुंचाने के लिए परिवहन की आवश्यकता होती है । उद्योगों के लिए सूचनाओं के आदान - प्रदान एवं प्रबंधन के लिए संचार व्यवस्था भी जरुरी होती है । इसलिए परिवहन और संचार सुविधाएं उद्योगों की अवस्थिति का निर्धारण करती हैं ।
• सरकारी नीति : - सरकार संतुलित विकास के लिए प्रादेशिक नीति अपनाती है जिसके अंतर्गत विशिष्ट क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना की जाती है ।
•उद्योगों के मध्य संबंध : - कुछ उद्योग दूसरे उद्योगों से संबंधित होते हैं इसलिए ऐसे उद्योग संबंधित उद्योगों के निकट ही स्थापित होते हैं ।
प्रश्न 5 : स्वच्छंद उद्योग से आप क्या समझते हैं ?
स्वच्छंद उद्योग : - ऐसे उद्योग जो कच्चे माल से जुड़े नहीं होते हैं उन्हें स्वच्छंद उद्योग ( Footloose Industries ) कहते हैं । उदाहरण स्विट्जरलैंड के घरेलू उद्योग में प्रयोग होने वाला कच्चा माल हल्का होता है तथा इसकी स्थापना में कच्चे माल का महत्व नहीं होता ।
प्रश्न 6 : आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण करें ।
अथवा
प्रश्न 6 : लघु ( छोटे पैमाने ) उद्योग और कुटीर ( घरेलू ) उद्योग में अंतर स्पष्ट करें ।
अथवा
प्रश्न 6 : लघु ( छोटे पैमाने ) उद्योग और बड़े पैमाने के उद्योग में अंतर स्पष्ट करें ।
आकार के आधार पर उद्योगों को निम्नलिखित तीन वर्गों में बांटा जाता है :
प्रश्न 7 : कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को कितने भागों में बांटा जाता है ? वर्णन करें ।
कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को 5 भागों में बांटा जाता है जो इस प्रकार है :
•कृषि पर आधारित उद्योग : - कृषि पर आधारित उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जो कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं जैसे कि सूती वस्त्र उद्योग , चीनी , चाय , वनस्पति घी आदि उद्योग इसके उदाहरण है ।
• खनिज आधारित उद्योग : - खनिज आधारित उद्योग ऐसे उदयोग होते हैं जिनमें खनिजों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है । इन उद्योगों को धात्विक तथा अधात्विक खनिज उद्योगों में वर्गीकृत किया जाता है । जिन उद्योगों में धातु का प्रयोग होता है वह धात्विक खनिज उद्योग होते हैं जैसे कि लोहा इस्पात उद्योग एल्युमीनियम और तांबा उद्योग जबकि सीमेंट मिट्टी के बर्तन आदि के उद्योग अधात्विक खनिज उद्योग होते हैं क्योंकि इन में धातु का प्रयोग नहीं होता है ।
• रसायन आधारित उद्योग : - रसायन आधारित उद्योग में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक खनिजों का उपयोग किया जाता है । जैसे कि पेट्रो रसायन उद्योग में खनिज तेल अर्थात पेट्रोलियम का उपयोग होता है ।
• वनों पर आधारित उद्योग : - वनों पर आधारित उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जिसमें वनों से प्राप्त उत्पाद का प्रयोग होता है जैसे की इमारती लकड़ी का प्रयोग फर्नीचर उद्योग के लिए किया जाता है इसके अलावा कागज उद्योग भी इसका एक उदाहरण है ।
•पशुओं पर आधारित उद्योग : - पशुओं पर आधारित उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जिनमें पशुओं से प्राप्त उत्पाद को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है । उदाहरण चमड़ा उद्योग के लिए चमड़ा एवं ऊनी वस्त्र उद्योग के लिए ऊन पशुओं से ही प्राप्त किया जाता है । .
प्रश्न 8 : उत्पाद आधारित उद्योग किसे कहते हैं ? इनका वर्गीकरण करें ।
उत्पाद आधारित उद्योग : - उत्पाद आधारित उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जो अन्य उद्योगों के तैयार माल या उत्पाद को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं । जैसे कि कागज उद्योग जिसमें लुगदी का प्रयोग किया जाता है जो कि लुगदी उद्योग का उत्पाद है ।
उत्पाद आधारित उद्योग को दो भागों में बांटा जाता है जो कि इस प्रकार है :
• मूलभूत या आधारभूत उद्योग : - ऐसे उद्योग जिनके उत्पाद को अन्य उद्योगों में वस्तुएं बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है उन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं । उदाहरण लौह इस्पात उद्योग क्योंकि लौह इस्पात का प्रयोग मशीनें बनाने में किया जाता है और इन मशीनों का उपयोग अन्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है ।अन्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है ।
• गैर आधारभूत या उपभोक्ता वस्तु उद्योग : - गैर आधारभूत उद्योग या उपभोक्ता वस्तू उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जो ऐसे उत्पादों का उत्पादन करते हैं जिनका प्रयोग उपभोक्ता करता है जैसे कि ब्रेड , बिस्कुट , चाय , साबुन , लिखने के लिए कागज , टेलीविजन इत्यादि का उत्पादन करने वाले उद्योग ।
प्रश्न 9 : स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए ।
स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को निम्न वर्गों में बांटा जाता है :
• सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग : - सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जो सरकार के अधीन होते हैं अर्थात जब किसी उद्योग का स्वामित्व तथा प्रबंधन सरकार के हाथ में हो तो उसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग कहते हैं ।
• निजी क्षेत्र के उद्योग : - निजी क्षेत्र के उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जिनका स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या निवेशकों के पास होता है ।
•संयुक्त क्षेत्र के उद्योग : - संयुक्त क्षेत्र के उद्योग ऐसे उद्योग होते हैं जिनको सरकार तथा निजी लोग मिलकर चलाते हैं ।
प्रश्न 10 : विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई किसे कहते हैं ?
कुटीर उद्योग या घरेलू उद्योग ।
प्रश्न 11 : धुंए की चिमनी वाला उद्योग किसे कहते हैं ?
अथवा
प्रश्न 11 : परंपरागत बड़े पैमाने वाले औद्योगिक प्रदेश से आप क्या समझते हैं ? इनकी पहचान कैसे की जाती है ?
परंपरागत बड़े पैमाने वाली औद्योगिक प्रदेश : -
परंपरागत बड़े पैमाने वाले औद्योगिक प्रदेश ऐसे क्षेत्र होते हैं जिसमें धातु पिघलाने वाले उद्योग , भारी इंजीनियरिंग , रसायन निर्माण , वस्त्र पिघलाने वाले उद्योग , भारी इंजीनियरिंग , रसायन निर्माण , वस्त्र उत्पादन आदि का कार्य किया जाता है ।
परंपरागत औद्योगिक प्रदेशों की पहचान निम्नलिखित बिंदुओं द्वारा की जा सकती है :
• रोजगार के अवसर अधिक होते हैं ।
•ग्रह घनत्व अधिक होता है जिसमें घर घटिया प्रकार के होते हैं ।
• बेरोजगारी की समस्या , उत्प्रवास और विश्वव्यापी मांग कम होने के कारण कारखाने बंद हो जाते हैं प्रत्येक भूमि का क्षेत्र ।
प्रश्न 12 : जर्मनी के रुहर कोयला क्षेत्र का वर्णन करें ।
जर्मनी का रूहर कोयला क्षेत्र : - जर्मनी का रूहर कोयला क्षेत्र यूरोप का परंपरागत बड़े पैमाने वाला औद्योगिक प्रदेश है । कोयले का विशाल भंडार तथा लोहा इस्पात उद्योग क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार था । लेकिन कोयले की मांग में कमी आने के कारण उद्योग ख़त्म होने लगे । जर्मनी के रहर कोयला क्षेत्र के महत्व का अनुमान इसी तरह से लगाया जा सकता है कि यह जर्मनी का 80 % इस्पात पैदा करता है ।
अब इस क्षेत्र में प्रदूषण व औद्योगिक अपशिष्ट की समस्या उत्पन्न होने लगी है । अब जर्मनी के रूहर क्षेत्र के भविष्य को कोयले का इस्पात उद्योग के बजाए नए उद्योग और विश्वविद्यालय तथा बड़े बड़े बाज़ारों के रूप में देखा जाता है । जिससे एक नया रूहर भू - दृश्य विकसित हो रहा है ।
प्रश्न 13 : उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग की संकल्पना का क्या अर्थ है ? अधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के क्षेत्रों में ही क्यों विकसित हो रहे हैं ।
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग : - उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग में यंत्रमानव , कंप्यूटर आधारित डिज़ाइन ( CAD ) तथा निर्माण , धातु पिघलाने एवं शोधन के इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण का प्रमुख स्थान है । उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग नई पीढ़ी की देन है जिसने पिछले कुछ दशकों में बहुत ही तेज गति से उन्नति की है ।
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के भूदृश्य में साफ - सुथरे बिखरे कार्यालय एवं प्रयोगशालाएं देखने को मिलती हैं । जिसमें व्यवसायिक श्रमिक सफेद कलर और नीले कलर के रुप में देखे जा सकते हैं ।
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के अधिकांश उत्पाद महानगरों में बेचे जाते हैं और प्रौद्योगिकी एवं कुशल श्रमिक भी महानगरों से ही मिलते हैं इसीलिए विश्व के अधिकांश देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के क्षेत्रों में ही विकसित किए जाते हैं । उदाहरण : - संयुक्त राज्य अमेरिका के सेन फ्रांसिस्को के निकट ' सिलिकॉन वैली ।
प्रश्न 14 : विश्व के लोहा इस्पात उद्योग का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
लोहा इस्पात उद्योग : - लोहा इस्पात उद्योग सभी उद्योगों का आधार है अर्थात सुई से लेकर बड़े बड़े जहाज का निर्माण लौह इस्पात उद्योग पर ही आधारित है । किसी भी देश के औद्योगिक विकास का मापदंड लोहा इस्पात उद्योग ही है । क्योंकि इस उद्योग मैं बड़ी मात्रा में भारी भरकम कच्चा माल उपयोग किया जाता है इसलिए इसे भारी उद्योग भी कहते हैं । सभी उद्योग इस पर आधारित होते हैं इसलिए इसे आधारभूत उद्योग भी कहते हैं । पृथ्वी से लोहे को शुद्ध रुप में प्राप्त नहीं किया जाता है । इसे लौह अयस्क के रूप में प्राप्त करते हैं और इस लौह अयस्क को कोक या कार्बन और चूना पत्थर के साथ मिलाकर भट्टियों में पिघलाया जाता है और लौह के रुप में प्राप्त किया जाता है । इसी कच्चा लोहा कहते हैं ।
वितरण : -
यह एक जटिल उद्योग है जो मुख्य था
उत्तरी अमेरिका यूरोप एवं एशिया के देशों में ही विकसित है ।
संयुक्त राज्य अमेरिका में लौह इस्पात का उत्पादन करने वाले प्रमुख क्षेत्र
उत्तर अप्लेशियन प्रदेश ( पिट्सबर्ग ) , महान झील क्षेत्र तथा अटलांटिक तट है ।
संयुक्त राज्य अमेरिका के अतिरिक्त लोहा इस्पात उद्योग के मुख्य केंद्र निम्नलिखित है :
•ग्रेट ब्रिटेन : बरमिंघम एवं शेफील्ड
•जर्मनी : डूइसबर्ग एवं एसेन
•फ्रांस : सेंट इटिनी
•रूस : सेंट पिट्सबर्ग एवं मॉस्को
•यूक्रेन : रॉग एवं दोनेत्स्क
•जापान : टोक्यो एवं नागासाकी ।
•चीन : शंघाई एवं वूहान
•भारत : जमशेदपुर राउरकेला भिलाई और विशाखापट्टनम ।
प्रश्न 15 : ' जंग का कटोरा ' किसे कहा जाता है ।
उत्तर अप्लेशिन प्रदेश के ' पिट्सबर्ग क्षेत्र को जंग का कटोरा ' कहा जाता है इसका महत्व अब घट रहा है ।
प्रश्न 16 : विश्व के सूती कपड़ा उद्योग का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
सूती कपड़ा उद्योग : - सूती कपड़ा उद्योग में सूती कपड़े का निर्माण हथकरघा , बिजली करघा एवं कारखानों में किया जाता है । इस प्रकार इस उद्योग के तीन निम्नलिखित क्षेत्र है :
•हथकरघा : - यह श्रम आधारित उद्योग है जिसमें अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं और पूंजी की आवश्यकता कम होती है । इस में अधिकतर काम हाथ से किया जाता है ।
•बिजली करघा : - इसमें श्रम की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है और अधिकतर कार्य बिजली से चलने वाले उपकरणों के द्वारा किया जाता है ।
•कारखाना : - कारखाना सूती कपड़ा उद्योग की एक बड़ी इकाई है जिसमें वस्त्र का निर्माण बड़े स्तर पर और बड़े - बड़े कारखानों में किया जाता है । इसमें पूंजी की अधिक आवश्यकता होती है और उच्च कोटि के वस्त्रों का बड़ी मात्रा में उत्पादन किया जाता है ।
विश्व वितरण : - सूती वस्त्र उद्योग का विकास अच्छी किस्म की कपास पर निर्भर करता है ।
विश्व के 50 % से अधिक कपास का उत्पादन भारत चीन संयुक्त राज्य अमेरिका पाकिस्तान उज्बेकिस्तान एवं मिश्र में किया जाता है इसलिए इन 6 देशों में सूती वस्त्र उद्योग का विकसित होना स्वाभाविक ही है जबकि ग्रेट ब्रिटेन , जापान और यूरोप के देशों में आयातित कपास पर आधारित सूती वस्त्र उद्योग हैं ।
प्रश्न 17 : कृषि व्यापार या कृषि कारखाने का क्या अर्थ
कृषि व्यापार : - कृषि व्यापार एक व्यापारिक कृषि है जो औद्योगिक पैमाने पर की जाती है । इस कृषि में बड़े आकार के फार्म होते हैं जो कि यंत्रीकृत ( मशीनीकृत ) और रसायनों पर निर्भर करते हैं इसलिए इसे कृषि कारखाने ' भी कहते हैं ।












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